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| Spinal Cord | रीढ़ की हड्डी होती है जीवन का आधार जो उठाती है हमारा भार । |
मेरुदंड को अंग्रेजी में Spinal cord कहते हैं । इसको अन्य नाम जैसे : रीढ़ की हड्डी , बैकबोन के नाम से जाता है । मेरुदंड हमारे शरीर को आकार , झुकाव देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । यह गर्दन की अस्थियों से प्रारंभ होकर नीचे श्रोणि मेखला तक जाती है । यह अनेक छोटी छोटी अस्थियों से मिलकर बना होता है । मेरुदंड हमारे शरीर को आधार देने का काम करता है । इसकी सहायता से ही हम खेल कूद , भाग दौड़ , नाचना जैसी गतिविधि आसानी से कर पाते हैं ।
इसकी सहायता से हम अपने शरीर को झुका पाते हैं । मेरुरज्जु / मेरुदंड हमारे शरीर को संतुलित रखता है ।
आइये जानते हैं , कैसी होती है मेरुदंड की संरचना ?
हमारे शरीर के कंकाल तंत्र में रीढ़ की हड्डी की बहुत ही अहम भूमिका है । यह हमारे शरीर को गति , आकर देने में उपयोगी होती हैं । रीढ़ की हड्डी हमारे सिर की पसलियों और कूल्हों को जोड़ती है । यह हमारे शरीर के ऊपरी हिस्से को बहुत ही मजबूती से सहारा देने का काम करती है । हमारी रीढ की हड्डी में 33 हड्डियां होती हैं जो एक दूसरे से जुडी रहती हैं ।
जिसमे पहला भाग गर्दन से जुड़ा होता है जिसमे 7 छोटी छोटी हड्डियां जुड़ी होती है जिसे सर्वाइकल कहते हैं । सर्वाइकल भाग की ऊपरी दो हड्डियों पर है हमारी खोपङी टिकी हुई होती है उन दो हड्डियों को एटलस व एक्सिस कहते हैं । ये दोनों अस्थियां ही पिवट जोड़ बनाती हैं । जिसके सहारे है हम अपने सिर को ऊपर ,नीचे ,दाये ,बाये आसानी से घूमा पाते हैं ।
दूसरा भाग पसलियों वालो भाग होता है जो हमारी रिब्स के जोड़ों से लगा रहता है । इसमें 12 छोटी छोटी हड्डियां होती हैं जिसे थोरासिस कहते हैं । यह ट्रू रिब्स , फॉल्स रिब्स व फ्लोट रिब्स के रूप में पसलियों से जुड़ी रहती हैं।
इसके तीसरे भाग को लम्बर कहते हैं । इसमे भी 5 हड्डियां होती हैं । लम्बर बहुत अधिक मजबूत व हमारे शरीर का अधिक से अधिक भार यही उठाता है । जब हम झुककर अपने पैरों के अंगूठे को छूते हैं तो यही भाग हमारी झुकने में मदद करता है ।
चौथे भाग को स्क्राल कहते हैं जो हमारी कमर व पैरों से जुड़ा होता है इसमें भी 5 अस्थिया होती हैं
पांचवे भाग को काक्सीजियल कहते हैं जिसे पुच्छ भाग भी कहते हैं इसमे 4 अस्थियां होती हैं । इस तरह रीढ़ की हड्डी में कुल 33 अस्थियां होती हैं जो आपस मे एक दूसरे से जुड़ी रहती हैं ।
चौथा व पांचवा भाग मिलकर पेल्विक जोड़ का निर्माण करता है । हमारी पूरी रीढ़ की हड्डी में 23 कार्टिलेज डिस्क होती हैं जो शरीर को मजबूती व झुकाव में मदद करती हैं । सर्विकल में 6 , थोराक्स में 12 व लम्बर में 5 होती हैं ।
हमारी रीढ़ में 4 कर्व होते हैं । काक्सीजियल में कोई कर्व नही होता है ।
कैसे रखें अपनी spinal cord मेरुरज्जु का ख्याल ?
आपमें से बहुत कम लोगों को पता होगा कि 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के अलावा world spinal cord injury day भी मनाया जाता है । इसमें रीढ़ की हड्डी के बारे में व स्लिप डिस्क से संबंधित जानकारी लोगों को दी जाती है व साथ ही उनको रीढ़ का ख्याल कैसे रखें ये भी बताया जाता है ।
नीचे हम भी कुछ ऐसे ही कारण आपको बता रहें हैं जिनको अपना कर आप भी अपनी रीढ़ की हड्डी की देखभाल कर सकते हैं ।
(1) जब आप आफिस या घर पर कोई काम कर रहें हो या पढ़ाई कर रहे हो तो ज्यादा देर तक झुककर न बैठे । साथ ही चलते समय भी आप पीठ को झुका कर नही चलें ।
(2) जब आप जिम में एक्सरसाइज कर रहें होते हैं तो अपनी क्षमता से अधिक वजन न उठाएं । अगर संभव हो तो एक्सरसाइज को अपने पार्टनर के साथ करें ।
(3) आप योगा के द्वारा भी अपनी रीढ़ की हड्डी को मजबूत कर सकते हैं व उसको लचीला बना सकते हैं । जिसमे मज्जरासन बहुत अधिक लाभकारी होता है ।
(4) यदि आप स्लिप डिस्क से परेशान हैं तो आयंगर आसन को अपना सकते हैं इससे आपको अपने स्लिप डिस्क के दर्द में काफ़ी आराम मिलेगा ।
(5) उबड़ खाबड़ सड़क पर अपने वाहन को आराम से व धीरे धीरे चलाये व अधिक लंबी यात्रा को तय करते समय बीच बीच मे थोड़ा थोड़ा रुककर आराम कर लेना चाहिए ।
उपरोक्त बातों का ध्यान रखकर आप अपनी रीढ़ की हड्डी / मेरुरज्जु / मेरुदंड का ख्याल रख सकते हैं ।




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