YOGA | जीवन को बनाना है यदि निरोग तो रोजाना करो योग ।

YOGA |  जीवन को बनाना है यदि निरोग तो रोजाना करो योग ।

भयंकर प्रदूषण व अस्त व्यस्त लाइफस्टाइल ने हमारे शरीर को कई समस्याओ से ग्रस्त कर दिया है । जैसे : कब्ज , पेट दर्द , जोड़ों का दर्द , आंखों का कमजोर होना , मोटापा आदि । ऐसी कई समस्याएं हैं जो हमें घेरे हुए हैं। 
क्या आप जानते हैं कि योगा के द्वारा इन सभी से छुटकारा पाया जा सकता है व एक स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है । 

आइये जानते हैं , योगा क्या है ?

योगा शब्द संस्कृत भाषा के " युज " धातु से निकला है , जिसका अर्थ जुड़ना होता है । योग विद्या भारतीय संस्कृति की सबसे प्राचीन विद्याओं में से एक है । यह लगभग 5000 वर्ष पुरानी विद्या है जिसका आज भी कई सारे लोग अपने जीवन मे उपयोग कर स्वयं को रोगमुक्त बनाये हुए हैं । यदि सरल शब्दों में कहें तो योग जिंदगी को सरल व आसान तरीके से जीने का विज्ञान है। योग हमें अध्यात्म से जोड़ने में मदद करता है । 
योग शब्द का  जिक्र भगवतगीता जो कि एक हिन्दू प्रतिष्ठित ग्रंथ है उसमें भी है । गीता में योग का  जिक्र अलग अलग कई रूपों में हुआ है । योग को बुद्धियोग , सन्यासयोग , कर्मयोग आदि नामों के द्वारा दर्शाया गया है  । इन सबका अर्थ अलग अलग है । 
ऋषि पतंजलि को व्यापक व औपचारिक रूप से योग दर्शन का संस्थापक माना जाता है । उन्होंने अपनी किताब अष्टांग योग में योग के आठ अंगों का वर्णन किया है जो योग का आधार है । 

(1)  यम - पांच परिहार 
(2)  नियम - पांच धार्मिक क्रिया 
(3)  आसन - बैठने का तरीका 
(4)  प्राणायाम - सांस को नियंत्रित करना / स्थगित करना 
(5)  प्रत्यहार  - अमूर्त 
(6)  धारणा - एकाग्रता 
(7)  ध्यान - एकाग्रता 
(8)  समाधि -विमुक्ति ( सकल्प  या विकल्प )
YOGA |योग


योग गुरुओं का महत्व  

योग को बहुत प्राचीन काल से अपनाया जा रहा है । यह समय के साथ सम्पूर्ण विश्व मे फैला है व और फैल रहा है। योग के विश्वभर में प्रचार प्रसार में योग गुरुओं का बहुत अधिक योगदान रहा है । 
कुछ विश्व प्रसिद्ध योग गुरुओं में बी.के.एस.अयंगर , स्वामी शिवानंद व बाबा रामदेव का नाम आता है । इन्होंने योग को जन जन तक पहुचाने में अपना विशिष्ट योगदान दिया है । 
बी.एस.के.अयंगर जी को अयंगर योग का संस्थापक माना जाता है । इन्होंने योगदर्शन पर कई किताबें भी लिखी हैं जिनमें लाइटमैन ऑफ योगा , लाइट ऑन द योग सूत्राज ऑफ पतंजलि व लाइट ऑन प्राणायाम शामिल हैं । 

आइये जानते हैं आसन व प्राणायाम में क्या अंतर हैं ?

मन को एकाग्र रखने वाले तथा मन को सुख देने वाले व बैठने के प्रकारों को आसन कहते हैं जैसे - लेटकर , बैठकर , पेट के बल लेटकर आदि। जबकि प्राणायाम एक दिव्य पद्धति है जिसमे सांस लेना व सांस छोड़ने की प्रकिया शामिल रहती है । प्राणायाम के दो रूप होते हैं - 
(1) हठयोग - इसमें सांस को लेकर व छोड़कर प्राणिक धाराओं में बदलाव किया जाता है । 
(2) राजयोग - इसमें अपने मन की इच्छाशक्ति के माध्यम से चेतना द्वारा सीधे शरीर पर नियंत्रण करना होता है ।

कौन-कौन से आसन हमारे लिए लाभदायक होते हैं ? 

अगर हम कुल आसनों की बात करें तो इनकी संख्या 84000 है । जिनमें से केवल 84 आसन ही हमारे लिए उपयोगी हैं । जिनमें से कुछ निम्न हैं - 

(1) अधोमुखा स्वानासन 

यह आसन आपकी मांसपेशियों को मजबूत बनाता है । इससे आपकी साइनस की समस्या भी दूर हो जाती है व रक्त परिसन्चरण में सुधार आता है । 

(2) ताड़ासन

यह आसन आपकी लंबाई बढ़ाने में काफी लाभकारी होता है । साथ ही इससे आपकी रीढ़ से संबंधित समस्याएं भी दूर हो जाती हैं । 

(3) सुखासन

यह आसन आपको आंतरिक रूप से शांति का अनुभव कराता है । जिससे चिंता व मानसिक तनाव दूर होता है । साथ ही यह रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न कर रीढ़ की हड्डी को लंबा व मजबूत बनाता है । 

(4) वीरभद्रासन 

यह भाग आपके शरीर के निचले भागों को स्वस्थ रखता है । इससे पैरों व हाथों को शक्ति भी मिलती है । 

(5) वृक्षासन

यह आसन जांघों ,पैर की हड्डी को मजबूत बनाता है व संतुलन बनाने में भी मदद करता है । 

इन आसनों के अलावा आप कुछ महत्वपूर्ण व उपयोगी प्राणायाम भी कर सकते हैं । 

(1) अनुलोम विलोम 

यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है इसके द्वारा शरीर के जोड़ों में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है , गठिया , हृदय रोग , मधुमेह , कब्ज आदि समस्याओं को दूर करने में मदद करता है । साथ ही इससे हमारे शरीर मे ऑक्सीजन का संचार भी अच्छी तरह से होता है । 

(2) कपालभाति 

यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होती है इसके द्वारा शरीर से 80% तक विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। इस प्राणायाम में पेट को बार बार अंदर करने से हमारे पेट के पाचक अंगों जैसे : आमाशय , लीवर , किडनी , पेनक्रियाज आदि को स्वस्थ रखता है । 

योग हमे प्राकृतिक रूप से स्वस्थ बनाता है । इसको अपना कर आप भी सुरक्षित रह सकते हैं । योग से हमारे शरीर को कोई नुकसान नही होता है । यह एक तरह से व्यायाम की तरह ही होता है जो हमें चुस्त व दुरुस्त बनाने में मदद करता है । साथ ही यह हमारे शरीर को छोटी बड़ी सभी बीमारियों से सुरक्षित रखने का काम करता है । 

इसको समझो व इस पर करो विचार योग है जीवन का आधार ।


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