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Showing posts from July, 2020

ये नीम है बड़े कमाल का

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नीम जितना कड़वा है ,उससे कहीं ज़्यादा शरीर के लिए इसके लाभ है। नीम को अजादिरचता इंडिका नाम से भी जानते है।  नीम का उपयोग सदियों से कई रोगो को ठीक करने में किया जाता रहा है। ये हमारे देश के साथ साथ कई समीपवर्ती देशो जैसे ,पाकिस्तान ,बांग्लादेश ,श्रीलंका ,नेपाल ,म्यांमार कई देशो में पाया जाता है। नीम का फ़ल अंडाकार और चिकना होता है जिसे हम निम्बोरी भी कहते है ,इसका स्वाद जितना कड़वा होता है उतना ही हमारे लिए फ़ायदेमंद होता है। आयुर्वेद में इसको विशेष औषधि का दर्जा दिया गया है। त्वचा रोगो के लिए ख़ासतौर इसे याद किया जाता है। नीम में किसी भी प्रकार के त्वचा रोगों को  ख़त्म करने की  क्षमता है, साथ ही साथ और भी रोगो में भी जादुई असर दिखता है।  नीम | NEEM  नीम के लाभ   मधुमेह के लिए-  नीम  मधुमेह ( शुगर ) रोगियों के लिए  वरदान है ,अगर शुगर लेवल कम नहीं हो रहा हो तो नियमित नीम का सेवन करे।  शुगर लेवल कम होना शुरू हो जायेगा। ये इन्सुलिन हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करता है। जिससे मधुमेह में  लाभ मिलता है।   त्वचा ...

STEVIA | स्टीविया चीनी से 300 गुना अधिक मीठा होता है।

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स्टीविया एक ऐसा पौधा है। जिसका आयुर्वेद में बहुत महत्व है। ये पौधा चीनी की तुलना में 40  गुना अधिक मीठा  और इसका अर्क 300 गुना तक मीठा होता है  ये सूरजमुखी प्रजातियों में से एक पाया जाने वाला पौधा है। इसकी पत्तियां  मीठी होने की वजह से लोग बहुत समय से चीनी के विकल्प के रूप से प्रयोग में लाते है। ये चीनी का बहुत अच्छा विकल्प माना जाता है क्योंकि चीनी के मुकाबले इसमें कैलोरी निल होती है। इसका स्वाद चीनी की तुलना काफी मीठा होता है और ज़्यादा देर तक बना रहता है। स्टीविया प्रकृति का एक अनूठा उपहार और स्वीटनर है  जिसका शरीर के लिए कोई दुष्प्रभाव नहीं। इसकी ताज़ा पत्तियों को चाय व  पेय और अन्य खाद्य पदार्थ आसानी से इस्तेमाल में ला सकते है।  इसलिए इसको मीठी तुलसी  भी कहा जाता है।   आज स्टीविया की खेती पूर्वी एशिया के अलावा कई देशो  में की जाती है। चीन सबसे ज़्यादा निर्यात करने वाला देश है और स्टीविया सबसे ज़्यादा खपत जापान में होती है। स्टीविया को दैनिक आहार के रूप में प्रयोग में लाया जाता है।आज बहुत सी खाद्य और पेय पदा...

आयुर्वेदा । सर्दी ,खाँसी ,बुखार में अपनाये ये आसान तरीका

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ayurveda -आयुर्वेदा अगर आपको सर्दी ,खांसी ,जुखाम बुखार हो रहा तो घर पर ही आप कुछ आसान उपाय कर सकते है। आपको अंगेजी दवाई खाने से परहेज़ है ,तो आयुर्वेदा में इसका उपचार है। हर घर में  तुलसी  होती है। आपको 8  से 10  तुलसी के पत्ते  4  से 5  लौंग थोड़ी सी अदरक इन सबको कूट ले। फिर एक 2  गिलास  पानी ले उसको बर्तन में पकने के लिए रख दे उसी में कुटा हुआ मिश्रण  ,उसको उसमे डाल  दे और थोड़ा सेंधा नमक डाल  दे उसको तब तक पकने दे जब तक पानी आधा न हो जाए। फिर छलनी से छान ले। धीरे धीरे सिप करते हुए उस काढ़े को पी ले।   काढ़े को पीने के बाद कपड़े  पहन कर चादर ओढ़ कर आराम करे जिससे आपको पसीना आ जाये। पसीना आते ही आपका बुख़ार धीरे धीरे उतरने लगेगा साथ ही साथ सर्दी खांसी में भी राहत मिलेगी। काढ़े को दिन में दो से तीन बार ज़रूर बनाकर पिए आपको ज़रूर लाभ मिलेगा।   तेज बुखार हो रहा है आपको रहत नहीं मिल रही है। ऐसे में ठन्डे पानी ले एक कॉटन का रुमाल या कपड़ा ले उससे बनी पट्टी को माथे पर रखे हर 1  से 2 मि...

Kids Health | सावधान | आपका बच्चा कहीं फ़ोन का आदि तो नहीं हो गया

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आज के दौर में मोबाइल फ़ोन हमारे लिए एक साधन है जिससे हम पलक झपकते सारे काम बहुत आसानी से   कर लेते है। चाहे वो मूवी टिकट्स बुक करना हो ,ट्रेन की टिकट्स बुक करनी हो ,ऑनलाइन शॉपिंग ,गेम्स चाहे कुछ भी घर से लेकर बहार तक सब कुछ बहुत आसान हो गया है। यहाँ तक की अपने रोते  हुए बच्चे को चुप करना हो उसके लिए भी हम अपने फ़ोन का यूज़  कर लेते है। आप घर में कुछ काम कर रहे है आपका बच्चा रो रहा है तो आपको सबसे आसान तरीका यही लगता है के अपना फ़ोन बच्चे को दे देते है और बच्चा चुप जाता है आप फिर काम में लग जाते है। अगर आप ऐसे करते है तो आज से ही सावधान हो जाईये। ये आपके बच्चे के लिए बहुत ख़तरनाक हो सकता है। शोध में ये पता चला है बच्चे ही नहीं हर उम्र का इंसान फ़ोन का आदि  हो चुका है लोग वास्तविक दुनिया से दूर होते जा रहे है ये चीज़ बच्चो से लेकर बड़ो तक सब पर लागू होती है। अगर बच्चा घंटो फ़ोन ,टेबलेट ,टीवी या कंप्यूटर पर ज़रूरत से  ज्यादा   अपना समय बिता रहा है तो उसके लिए मानसिक और शारारिक तौर पर  बहुत हानि कारक  है।       ...

Tulsi | तुलसी - किसी भी बुखार को तोड़ने की ताक़त है इसमें

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TULSI -तुसली तुसली एक ऐसा चमत्कारिक पौधा है। जिसके कुछ ऐसे गुणों और लाभों के बारे आप नहीं जानते होंगे। जो आपको स्वस्थ्य जीवन जीने में मददगार साबित होंगे , जिस घर में तुलसी का पौधा है उस घर बीमारियां नहीं आ सकती ज़रूरत है , इसको प्रयोगो और लाभों के बारे में जानने की। पहले जान लेते है तुलसी के बारे में।  तुलसी का शब्द लैटिन OCIMUM, अंग्रेजी में HOLY BASIL संस्कृत में वृंदा ,सुगंधा,अमृता हिंदी में  तुलसी कहा गया है। तुलसी दो प्रकार की होती है। एक राम तुसली दूसरी श्याम तुलसी राम तुलसी का रंग हल्का हरा होता है जबकि श्याम तुलसी का रंग गाढ़ा हरा होता है। औषधीय गुणों की बात करे तो श्याम तुलसी में अधिक गुण पाए जाते है राम तुलसी की तुलना में , ये एक ऐसा पौधा है जो आपको 24 घंटे ऑक्सीजन देता है और कभी भी किसी भी मौसम में इसे लगाया जा सकता है। हिन्दू धर्म में धार्मिक व पौराणिक आधार से इसकी बहुत मान्यता है। इसलिए इसकी पूजा की जाती है। कहा जाता है जिस घर में तुलसी का पौधा होता है।  उस घर से निगेटिव एनर्जी दूर रहती है और पॉजिटिव एनर्जी बढ़ती है।...

MEDICINE | HEALTH SUPPLEMENT - दोनों में फ़र्क समझना आपके लिए है बहुत ज़रूरी

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HEALTH SUPPLEMENTS | MEDICINES MEDICINE और  HEALTH SUPPLEMENT   में फ़र्क समझना आपके लिए बहुत ज़रूरी है। अगर हिंदी में कहे तो दवाई और शरीर के पूरक आहार ये दोनों देखने में एक ही लगते है इसलिए हम हेल्थ सप्लीमेंट को भी दवाई कहने लगते है ,यहाँ पर बस अपनी थोड़ा सा ज्ञान और नज़रिया बदलने की ज़रूरत है। जब हम किसी टेबलेट  और कैप्सूल को देखते है ,तो हम सीधे उसको दवाई बोल देते है ,लेकिन वो कैप्सूल और टेबलेट हेल्थ सप्लीमेंट के भी हो सकते है। जैसे आमला ,एलोवेरा , नीम ,अलसी , नारियल ऑइल , एमिनो एसिड के कैप्सूल आदि। यहाँ पर ये सारे पूरक आहार है ,जो आपको खुराक में देने के लिए कैप्सूल या टेबलेट में बदल दिया। कैप्सूल और टेबलेट सिर्फ़ एक माध्यम  है  पूरक आहार को आपके शरीर में पहुंचने का , इसलिए हर कैप्सूल या टेबलेट को दवाई समझने की भूल मत करना।  HEALTH SUPPLEMENTS MEDICINE ( दवाई ) की भूमिका - दवा की ज़रूरत हमे तब होती है जब हम बीमार है । जैसे - आपको बुखार आया आपने पेरासिटामोल की टेबलेट ले ली ऐसे में आपका बुखार ठीक होना शुरू हो जाता है। और आप ठीक भी जाते है। ल...

Sea Buckthorn | ये सुपर फ़ूड भारतीय सेना को बनायेगा और भी मजबूत

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Sea Buckthorn   नाम सुनकर आपको ऐसा लगता होगा ये समुद्र में पाया जाता है। ये एक पौधा है जो पहाड़ो की ऊँची कठोर बर्फ़ीली पहाड़ियों में पाया जाता है। ये आपको लेह लद्दाख कारगिल की पहाड़ियों में किसी नदी किनारे या पहाड़ो के जंगल में आम तौर पर मिल जायेगा।    इसलिए इसको हिमालया बेरी नाम से भी जानते है,  ये एक सुपरफ़ूड है, जो हमारे सेना को पहले से जाएदा मजबूत बनाएगा। अगर इसके गुणों की बात की जाए तो इसका इतिहास काफ़ी पुराना है।  Sea Buckthorn   के गुणों और चिकित्सा लाभों की जानकारी आज से 800 ईसा पूर्व लिखी गई तिब्बती पुस्तक सीबू यदीन में है।   Sea Buckthorn  एक ऐसा सुपरफूड है। जिसका जड़ भी काम की  है, फ़ल  भी काम का है और पत्ती भी काम की है, ये पौधा जलवायु की किसी भी परिस्थियों में अपने आप को बनाये रखता है।  शोध में पता चला है अगर दुनिया की सारी  बीमारी खत्म करना है तो ये अकेला  Sea Buckthorn  काफ़ी है ,क्युकी इसमें सबसे जाएदा एंटी ऑक्सीडेंट होता है ,इसमें सारे विटमिन मिनरल मौजूद होते है। अब तक ये कहा जाता थ...

N-95 मास्क नहीं है, सुरक्षित

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CORONA - N95 MASK  N-95 मास्क नहीं है ,आपके लिए सुरक्षित , जी हां नए शोध में ये पता चला है। सबसे सुरक्षित समझे जाने वाला मास्क N-95 बिलकुल भी सुरक्षित नहीं है। ये सूचना स्वस्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को N-95 मास्क पर रोक और इसे प्रयोग में न लाने की सलहा दी है।  स्वस्थ्य मंत्रालय के अनुसार  N-95 मास्क जिसमे रेस्पिरेटरी बॉल्ब लगा है, वो प्रयोग में न लाये। क्युकी ये मास्क आपको तो सुरक्षित रखता है, लेकिन आपके आस पास के लोगो को बिलकुल भी नहीं ,अगर आप कोरोना पॉज़िटिव है ,और आपको  ये पता नहीं के आप पॉज़िटिव है ये मास्क पहने हुए है ,तो संभव है के आपके आस पास के लोग कोरोना संक्रमित हो सकते है। कोरोना के मामले में भारत तीसरे पायदान पर है। जिस तरह से नए केस आते जा रहे है ,इस मामले में भारत पहले नंबर पर है।  N95 MASK AND CORONA क्यों सुरक्षित नहीं है ? N-95 मास्क - इस मास्क को बनाने में कई लेयर का यूज़ होता है ,इसमें कपड़े की पांच परते होती है जो हवा में मौजूद छोटे से छोटे कणो को साँस के रास्ते आपके शरीर में जाने से रोकती है। इसलिए...

मॉनसून में रखे अपना ख्याल पहले से और भी जाएदा

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बरसात का मौसम किसे अच्छा नहीं लगता ,लेकिन ये मॉनसून साथ में कई बीमारियाँ भी लाता है। ऐसे में हमें  जाएदा सतर्क और  सावधान रहने की ज़रूरत है। वो इसलिए गर्मी के बाद तुंरत मौसम बदलता है। इसी बदलते मौसम के साथ साथ हमे भी कुछ अपनी आदतों को बदलना पड़ेगा ,अगर ऐसा नहीं किया तो आप अपनी सेहत के साथ खेल रहे है। आगे आपको बताएँगे की आपको मॉनसून में आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। अगर ये  छोटे छोटे तरीको को अपनाया तो आप मॉनसून में गम्भीर बीमारियों से आप बच सकते साथ ही साथ अपने परिवार को भी बचा सकते है ,फिर ये मानसून मस्ती भरा होगा।  क्या करें क्या न करें   - साफ़ सफाई का ध्यान रखें -  इस मौसम में साफ़ सफ़ाई का ज़रूर ख्याल रखे , बरसात के मौसम में नमी की वजह से कई जगह फफूंदी आ जाती है ,जिसे आप वक़्त वक़्त पर साफ़ करते रहे। और कीड़े और बैक्टिरीया जाएदा होने का डर रहता है इसके लिए अच्छे फ़्लोर क्लीनर से फ़र्श को २ से ३ बार ज़रूर साफ़ करे। कही भी आसपास पानी को जमा न होने दे क्युकी उसमे मच्छर पैदा होने का डर बना रहता है जो बाद में डेंगू और मले...