Sleep। नींद
नींद आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। हम किसी किताब को पढ़ रहे हो किसी मूवी को लगातार देख रहे है। तो जितना ज्यादा हम उस पर ध्यान केंद्रित करेगे उतनी ही ज्यादा हमे नींद आने लगती है। आपने देखा होगा हम देर रात तक अगर अपना मोबाईल फ़ोन भी इस्तेमाल कर रहे होते है तब भी हमारी आंखे थकने लगती है और हमे नींद आने लगती है। अभी तक न्यूरोसाइंटिस्ट ये समझ नही पाए कि हमारा मस्तिष्क जागने की अवस्था से अचानक नींद की अवस्था मे कैसे चला जाता हैं। लेकिन शोध के जरिये पता चलता है यह कोई अचानक से होने वाली घटना नही है बल्कि यह बहुत धीरे धीरे आने वाली प्रक्रिया है। जब हम रात को अपने कमरे की लाइट बंद करके अपने बैड पर लेटने जाते है और आंखे बंद करते है तो धीरे धीरे हमारे मस्तिष्क से अल्फा वेब्स निकलनी शुरू हो जाती है। इस समय में हमारा मस्तिष्क बाहरी दुनिया से बिल्कुल अलग हो जाता है। फिर कुछ महत्वपूर्ण चरणों से गुजरने के बाद हम गहरी नींद मे आ जाते हैं।
चरण-1
में मस्तिष्क की तरंगें हल्की हो जाती है। लेकिन अभी भी अल्फा वेव्स की गति विधि धीरे धीरे हो रही होती है। इस दौरान केवल 10% लोगों का ही कहना है कि वे सो रहे होते है। जब आप किताब पढ़ रहे होते है तो थोड़ी थोड़ी देर के लिए नींद की आगोश में जाते रहते हैं।
चरण-2
जब हमारा दिमाग चरण 2 में जाता है और इस दौरान शुरुआत में हमे नींद आ जाती है। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है इस दौरान भी अचानक से आंख खुल जाती है। इसके बाद हम चरण 3 और 4 में जाते है जिसे स्लो वेव स्लीप कहा जााता है और इस दौरान अंत मे हम रेम स्लीप अवस्था में चले जाते है। ये वो अवस्था होती है जिसमे हमे स्वपन आने लगते हैं 90% लोग कहते हैं 3 और 4 में उन्हें सही से नींद आ जाती है।
सम्पूर्ण नींद क्यों लेनी जरूरी है?
जीने के लिए जैसे हवा ,पानी और भोजन ज़रूरी है वैसे ही नींद भी ठीक से लेना बहुत ज़रूरी है। शेक्सपीयर ने नींद को हमारी ज़िंदगी का सबसे महत्वपूर्ण पोषक माना है। यह सभी जानते हैं कि शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ रखने के लिए नींद और आराम बहुत जरूरी है।
मानव शरीर की यही खासियत है कि दिनभर शरीरिक थकान की पूर्ति रातभर की नींद में पूरी हो जाती है। जो लोग रात में ठीक से नहीं सो पाते उन्हें किसी न किसी तरह दिन में अपनी नींद की पूर्ति करना जरूरी होता है। हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएँ नींद पूरी न किये हुए ड्राइवरों के कारण होती हैं।
नींद में कमी के लक्षण
* आपने देखा होगा जब आप सम्पूर्ण नींद नही लेते हैं तो पूरे दिन हमारा मन उदास और शांत रहता हैं।
* कभी कभी तो नींद पूरी न होने से चिड़चिड़ापन भी होने लगता है जिस्से हमे छोटी छोटी बातों पर जल्दी गुस्सा आने लगता है।
* पूर्ण रूप से जो नींद नही ले पाते है उनको बेचैनी होती है फिर यदि हम कुछ भी नया काम करने की कोशिश करते है तो असफल रहते हैं
* सम्पूर्ण नींद न लेने से हम भूलने की बीमारी से ग्रस्त होने लगते हैं। जिससे हम अपनी कोई भी बस्तु कही पर भी रख कर भूल जाते है।
* सम्पूर्ण नींद न लेने से हमे दिन भर उबासी (जम्हाई) आती रहती हैं जिससे हम अपने ध्यान को एक जगह केंद्रित नही कर पाते हैं।
* कभी कभी नींद पूरी न होने पर हमें भूख ज्यादा लगने लगती है व हमारी मनोदशा में निरंतर परिवर्तन होता रहता हैं। जिससे हमारा पूरा दिन बेकार हो जाता हैं।
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