पारिजात ( हरश्रिंगार ) | जिस पौधे का रोपड़ मोदी जी ने किया , क्या इसके अनोखे फ़ायदे जानते है।

jasmine | पारिजात ( हरश्रिंगार )

मोदी जी ने अयोध्या राम मंदिर में पारिजात पौधे का रोपड़ किया।  तब से बहुत लोग इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक है। आखिर ये कौन सा पेड़ या पौधा है। जिसका नाम आज तक नहीं सुना बाकई में बहुत से लोग इसके बारे में नहीं जानते है। आज आपको इसके और इसके लाभ के बारे में विस्तार से बताते है। 

पारिजात को हम हरश्रिंगार नाम से भी जानते है। इसका पेड़ और पौधा आपको आस पास ही मिल जायेगा। जिसके पत्ते लम्बे और इसका फूल सफ़ेद रंग का होता है जो देखने में बहुत खूबसूरत और मनमोहक होता है इसके फूल के बीच का भाग नारंगी और पौधा झाड़ीदार होता है।  इसकी लम्बाई 25 से 30  फ़ीट तक की होती है। इसके नाम और गुणों का लेख कई प्राचीन ग्रंथो में देखने को मिलता है। इसके लाभों के बारे में बात करे तो शरीर के लिए इसके अनगिनत फ़ायदे  है। 

हरश्रिंगार नाम से क्यों जानते है ?

इसका दूसरा नाम हरिश्रृंगार भी है। हिन्दू धार्मिक मान्यतायों से जाने तो इसके सफ़ेद फ़ूलो से भगवान हरि का श्रृंगार किया जाता है। जिसके कारण इसको हरश्रिंगार नाम से जानते है। 

पारिजात ( हरश्रिंगार ) | flowers 


इसके औषधिये गुणों की बात करे तो इसके फूलो और पत्तो में सबसे ज़्यादा औषधिये गुण  होते है। जिसका प्रयोग शरीर के कई विकारो में किया जाता है। 

घुटने के दर्द में लाभ 

पारिजात के औषधिये गुणों से घुटनों से जुडी समस्या जैसे आर्थराइटिस ,घुटनों  का दर्द आदि में बहुत लाभ मिलता है। इसके जड़ और पत्तो का काढ़ा १० से २० मिली ग्राम मात्रा में पिए और इसके पत्तो को पीस कर घुटनो पर इसका लेप लगाने से घुटनों के जोड़ो को बहुत लाभ मिलता है। 

 पेशाब की  बार बार आने की समस्या 

इसके जड़ ,पत्तो और फूलों का काढ़ा बनाकर पीने के किडनी से जुड़े रोगो में लाभ मिलता है और बार बार पेशाब के आने की समस्या से निजात मिलती है। 

दाद ,खाज खुजली करे ठीक 

पारिजात पेड़ के बीज का पेस्ट  दाद ,खाज खुजली वाली जगह पर लगाए आपको लाभ मिलेगा साथ ही साथ त्वचा की हर समस्या में लाभ मिलता है। 

पारिजात का काढ़ा 

इसके बने काढ़े से कई रोगो में लाभ मिलता है  ,जैसे - डाइबिटीस ,खांसी , गले में खरास , तंत्रिका तंत्र विकार , तेज़ बुखार को उतारने में और पाचन क्रिया को ठीक करने में किया जाता है। 


कैसे लाये उपलोग में 

पारिजात के ,पत्ते , जड़ ,तने की छाल ,फूल और बीज प्रयोग में लाये जाते है। 

काढ़े के लिए मात्रा - 15 से 25 ml  
 रस की मात्रा - 5 से 10 ml 

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चेतावनी - चिकित्सक से परामर्श ज़रूर ले 


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