अश्वगंधा किसी संजीविनी से कम नही है ।

  
अश्वगंधा एक  आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो कई बीमारियों को ठीक करने के गुण रखती है । यह आयुर्वेद में संजीविनी बूटी की तरह काम करती है । अश्वगंधा एक झाड़ीदार पौधा होता है जो विभिन्न प्रकार के रोगों में रामबाण का काम करता है ।इसका वानस्पतिक नाम विथानिया सोमनिफेरा है । जो सोलेनेसी वंश का पौधा है । इसे विंटर चेरी , भारतीय जिनसेंग , असगंध के नामो से जाना जाता है । अश्वगंधा प्रमुख रूप से भारत के शुष्क प्रदेशों जैसे मध्य प्रदेश और राजस्थान में अधिक पायी जाती है । इसके अलावा यह भारत से बाहर नेपाल , अफ्रीका और मध्यपूर्वी देशों में भी पाई जाती है । अश्वगंधा को मराठी भाषा मे असगंध कहा जाता है । इसके संस्कृत में कई अन्य नाम भी है जैसे - बराहकर्णी , वाजिगंधा , गंधाता , वरदा आदि । 

Ashwagandha | अश्वगंधा 

अश्वगंधा पूरे भारत मे 1500 मीटर की ऊंचाई तक के क्षेत्रों में पाई जाती है । इसके फल देखने मे छोटे होते हैं मगर पकने के बाद यह लाल रंग के हो जाते हैं । इसकी जड़  बाहर से देखने मे भूरी जबकि अंदर से सफेद होती हैं । इन्ही जड़ों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा आयुर्वेदिक औषधियों को बनाने में किया जाता है । 

आयुर्वेद जनक चरक ने क्या कहा है अश्वगंधा के बारे में - 

आयुर्वेद के जनक चरक ने भी अश्वगंधा को सर्वश्रेष्ठ जड़ी बूटी माना जाता है । उन्होंने कहा है कि अश्वगंधा या मेध्या रसायन के उपयोग से पुरुष दीर्घ आयु , तीव्र स्मरणशक्ति, धातुपूर्तिकरक , उच्चकोटि का शारीरिक तथा इन्द्रियबल , उत्कृष्ट प्रभा को प्राप्त करता है । 

आइये जानते हैं कि अश्वगंधा किन किन समस्याओं में लाभ पहुँचता है। 

अश्वगंधा एक चमत्कारिक औषिधि है जो कई प्रकार की शारीरिक समस्याएं ( बाहरी एवं आंतरिक ) दूर करने की क्षमता रखता है । अश्वगंधा जिन समस्याओं में काम करता है वे इस प्रकार हैं - मधुमेह नियंत्रित करने में , रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में , सूजन कम करने में , बैक्टिरियल इंफेक्शन को दूर करने में , थायरॉइड ग्रंथि को उचित ढंग से काम कराने में , पुरुषों में टेस्टेस्टेरोन को बढ़ाने में , उचित नींद , तनाव कम करने में व अन्य मानवीय व स्त्री के गुप्तांगों और सभी सैक्स से संबंधित समस्याओं में आदि । इसके अलावा ये कई अनगिनत समस्याओं में भी उपयोगी है ।

Ashwagandha | अश्वगंधा 
 

कैसे करें अश्वगंधा का उपयोग - 

अश्वगंधा आपको विभिन्न मेडिकल स्टोर पर मिल जाती है । ये बाजारों में पाउडर टेबलेट के रूप में उपलब्ध रहती है । 
(1)  अश्वगंधा का पाउडर या चूर्ण आप दूध के साथ या दूध में मिलाकर पी सकते हैं । इसे आप एक गिलास दूध में 1 छोटी चम्मच ही लेना चाहिए ।
(2)  अश्वगंधा की आप चाय भी बनाकर पी सकते हों । इसकी चाय बहुत लाभकारी होती है । 
(3)  अश्वगंधा में तिल , उड़द , गुड़ , व घी समान मात्रा में मिलाकर आप आप लड़डू बनाकर भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं । 

क्या अश्वगंधा से नुकसान भी होता है ?

अश्वगंधा एक जड़ी बूटी है । वैसे तो इसके उपयोग से कोई दिक्कत नही आती है । परंतु इसकी सही मात्रा और सही तरीके से सेवन न किया जाए तो आपको गैस , उलटी , अफरा , दस्त , अधिक नींद आना आदि समस्याएँ हो सकती हैं । 

अभी हाल ही में आई .आई. टी. (दिल्ली) व नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी (जापान) ने मिलकर इस पर एक शोध किया जिसमें उन्होंने इसमे पाए जाने वाले रसायन विथानन (withanone) की जानकारी हुई है । उन्होंने बताया है कि इस रसायन से कोरोना की दवा तैयार की जा सकती है । इससे बनने वाली दवा कोरोना से बचाव में अहम भूमिका निभा सकता है । क्योंकि ये कोरोना वायरस से शरीर मे चल रहे रीऍप्लिकेशन को रोक सकता है । 

अश्वगंधा (असगंध) धरती पर पायी जाने वाली एक बहुमूल्य वनस्पति है । इसका उपयोग हम सभी के लिए संजीविनी का काम कर सकता है । 

चेतावनी - चिकित्सक  परामर्श ज़रूर लें। 

और पढ़े  CLICK करें 👇

WISH U HEALTH 

Comments

Post a Comment