Shatavari | शतावरी है औषधियों की रानी ।

Shatavari | शतावरी है औषधियों की रानी । 



शतावरी एक बेल के रूप में पाई जाती है । यह ऐस्पैरागस वंश से है । इसका वानस्पतिक नाम ऐस्पेरेगस रेसीगोसस है । इसे कई नामों से जैसे : शतावर , शतावरी , सतमूल आदि नामों से जाना जाता है । इसकी जड़ें गुच्छों के रूप में पाई जाती हैं । वर्तमान परिस्थिति में यह पौधा लुप्त होने की कगार पर है ।
शतावरी भारत , श्रीलंका व पूरे हिमालय के क्षेत्रों में पाया जाता है । यह कांटेदार लता के रूप में होती है व 1 से 2 मीटर तक लंबी होती है ।
शतावरी को आयर्वेद में औषधियों की रानी का दर्जा प्राप्त है । इसमें पाए जाने वाले रासायनिक तत्वों की बात करें तो इसमें ऐसमेरेगेमीन , पॉलिसाइक्लिक एल्कलॉइड ,स्टेराइडल सैपोनिन , फिलियास्पेरोसाइड सी व आइसोफ्लागेंस आदि तत्व पाए जाते हैं । शतावरी का प्रयोग आयुर्वेद के अलावा होमिओपेथी दवाइयों में भी किया जाता है ।

शतावरी किन किन समस्याओं में काम आती है ? 

शतावरी जो कि आयुर्वेद की रानी होती है । इसमें हमारे शरीर को स्वस्थ बनाने के कई गुण पाए जाते हैं । शतावरी महिलाओं के लिये बहुत ही उपयोगी होती है । यह उनके शरीर से जुड़ी कई सारी समस्याओं को दूर करने की क्षमता रखती है ।

इम्युनिटी और पाचन रखे दुरुस्त -

शतावरी में एंटीऑक्सीडेंट और प्रोबिओटिक होते है। जिससे आपकी इम्युनिटी और पाचन दुरुस्त रहता है। इम्युनिटी अच्छी होने से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सर्दी खांसी जुखाम कोसो दूर रहता है।  इसमें फाइबर की मात्रा ठीक होने कारण खाना अच्छी तरह से पच जाता और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। 

घाव सुखाने में -

 शतावरी में हीलिंग पावर अधिक मात्रा में पाई जाती है । जिसके चलते यह पुराने से पुराने घाव को भी जल्द से जल्द ठीक करने की क्षमता रखता है । 
शतावरी के पत्तों को तोड़कर उनका चूर्ण बनाकर उसे देसी घी में अच्छी प्रकार से तल लें । फिर इसे अच्छे से मिलाकर घाव पर लगाने से पुराने से पुरानी चोट व घाव ठीक हो जाती है । 

रतोंधी में -  

शतावरी के पत्तों को भूनकर उनका सेवन करने से रतोंधी की समस्या से भी छुटकारा मिलता है ।

मूत्र विकार में - 

शतावरी मूत्र से संबंधी सभी विकारों में काम करती है । इसके सेवन से पेशाब की जलन ,बार बार पेशाब आना जैसी समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है । 

बवासीर में -

 शतावरी को चूर्ण को संतुलित मात्रा में दूध के साथ लेने से बवासीर में लाभ मिलता है ।

पथरी में -

 शतावरी की जड़ से बने रस को गाय के दूध में मिलाकर पीने से पुरानी से पुरानी पथरी भी जल्दी से निकल जाती है 

Shatavari plant | शतावरी 
शतावरी से होने वाले नुकसान - 

शतावरी एक आयुर्वेदिक औषधि है । इसका कोई नुकसान नहीं होता है । लेकिन दिल की समस्या , किडनी या लीवर की समस्या से पीड़ित व्यक्ति इसको चिकित्सक से परामर्श के बाद उपयोग कर सकता है । साथ ही एलर्जी वाले व्यक्ति को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिये । 

शतावरी की जड़ का कन्द भाग हमारी थेरेपी में भी उपयोग किया जाता है । जो बाजारों में शतावरी  कल्प के नाम से बेची जाती है । शतावरी अपने आप में पूर्ण जड़ी - बूटी होती है । इसको वाइल्ड एसपैरागस भी कहते हैं । 




                         
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चेतावनी - चिकित्सक से परामर्श ज़रूर ले। 

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