Leucoderma || सफेद चक्कतों का इलाज संभव है ।

हम सभी लोग अपनी त्वचा का भरपूर ख्याल रखते हैं । लेकिन फिर भी कुछ कारणों से हमारी त्वचा कुछ रोगों से ग्रसित हो जाती है । ऐसी ही एक त्वचा से सम्बंधित बीमारी है - ल्युकोडर्मा । जिसे अंग्रेजी में विटिलिगो के नाम से जानते हैं । 
सामान्यता इसे सफेद दाग या चकत्ते के नाम से भी जाना जाता है । इस विकार को लोग कुष्ठ , छुआछूत की बीमारी के रूप में जानते हैं । ऐसा मानना बिलकुल गलत है क्योंकि यह कुष्ठ व छुआछूत की समस्या नहीं है । आज दुनिया भर की जनसंख्या का लगभग 0.5% लोग इससे प्रभावित हैं ।

Leucoderma || सफेद चक्कतों का इलाज संभव है ।

सफेद दाग कैसे बनते हैं ? 

सफेद दाग त्वचा रोग या चर्म रोग की श्रेणी में आते हैं । त्वचा पर सफेद दाग या विटिलिगो होने के प्रमुख लक्षण तीन प्रकार के हो सकते हैं - 
◆ पोषक तत्वों की कमी 
◆ एलर्जी 
◆ ल्युकोडर्मा 

यह एक ऐसा विकार है जिसमें शरीर के विभिन्न भागों पर सफेद दाग जैसे बन जाते हैं । जिसमें त्वचा का रंग बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं । जिस कारण इसमें सफेद रंग जैसे निशान बन जाते हैं । जो कोशिकायें त्वचा रंग बनाती हैं । उनको मेलानोसाइट्स कहा जाता है ।
सफेद दागों के विकार में आनुवंशिकी लक्षण भी जिम्मेदार होते हैं । जिससे यह व्यक्ति के शरीर से दूसरे व्यक्ति के शरीर पर फैल जाते हैं । 

क्या सफेद दागों का इलाज संभव है ? 

सफ़ेद दाग या विटिलिगो के बारे में यदि शुरुआत में ही पता चल जाए तो इसका उपचार कराना  आसान हो जाता है । लेकिन यदि यह शरीर पर पूरी तरह से कई हिस्सों में फैल जाता है । तो इसके उपचार में समय लग सकता है । इसके उपचार के लिए विभिन्न प्रकार की दवाओं आदि का उपयोग किया जाता है । जिनके परिणाम आने में साल भर या उससे अधिक का समय लग सकता है ।
सफेद दागों  का उपचार निम्न बातों पर निर्भर करता है - 
◆ त्वचा पर इनकी संख्या कितनी है । 
◆ सफेद दाग कितनी जगह में फैले हुये हैं व इनका आकार कितना बड़ा है । 
◆ पीड़ित व्यक्ति के अनुसार उपचार की प्राथमिकता । 
 
इसमें व्यक्ति की त्वचा के अनुरूप ही इलाज किया जाता है ताकि व्यक्ति की त्वचा को हानि न पहुंचे ।

सफेद दागों के उपचार के दौरान क्या क्या परहेज करना चाहिये ? 

इस विकार के पर्याप्त इलाज के लिये आपको अपने खान पान का भी उचित देखभाल करनी चाहिये । 
इसमें तरबूज , खरबूज , सन्तरा , करौंदा , आलू बुखारा , काजू , सीताफल , अमरूद , लहसुन , टमाटर , छाछ , दही , दूध व फास्ट फूड के सेवन से बचना चाहिये ।इनके स्थान पर आप हरे पत्तेदार  सब्जियों का सेवन करना चाहिये । 

विटिलिगो के उपचार के लिये आप एलोपैथी के अलावा आप आयुर्वेद चिकित्सा व होमियोपैथी चिकित्सा का भी सहारा ले सकते हैं । 

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