Touch me not | छुईमुई के कई चौकानें वाले फ़ायदे भी होतें हैं, लेकिन ये फ़ायदे शायद ही किसी को मालूम होंगे।
छुईमुई । लाजवंती
जैसा कि छुईमुई या लाजवंती के नाम से ही समझ आता हैं की यदि हम इस पौधे को अपने हाथों से छूते हैं तो ये शर्मा जाती हैं। लाजवंती सिर्फ इंसानों के छूने मात्र से ही नही बल्कि हवा या किसी औऱ चीज़ के स्पर्श से भी शर्मा जाती है जब लाजवंती को शर्माती है तो इसकी पत्तियां एकदम से सिकुड़ जाती हैं औऱ थोड़ी देर के बाद अपने आप ही अपनी पहली वाली अवस्था में आ जाती हैं। माना जाता हैं छुईमुई शर्माने के साथ साथ औषधिएँ गुणों से भी भरपूर होता हैं इसलिए इसका उपयोग आयुर्वेद में हमेशा से किया जाता रहा हैं। छुईमुई के पौधें अनेको रूपों में मिलते हैं इसके फूल छोटे व गुलाबी रंग के होते हैं छुईमुई की तासीर ठंडी औऱ स्वाद में कड़वी होती हैं। आयुर्वेद में छुईमुई के लिए अनेको फ़ायदे बताए गए हैं।छुईमुई या लाजवंती को अलग अलग भाषाओं में अलग अलग नामों से जाना जाता हैं।
संस्कृति में-- लज्जालु, नमस्कारी
हिंदी-- छुईमुई, लाजवंती
इंग्लिश-- हम्बल प्लांट, टच मी नॉट
पंजाबी-- लाजवंती
बंगाली-- लज्जाबति, लाजक
मराठी-- लाजालु, लाजरी
मलयालम-- टोटावडी
नेपाली-- भूहरीझार
छुईमुई या लाजवंती के फ़ायदे।
जो लोगों को अक्सर मौसम में बदलाव की वज़ह से खांसी से परेशान रहते हैं तो छुईमुई से इसका इलाज किया जा सकता हैं छुईमुई की जड़ों को गले में बांधने से खांसी की समस्या में आराम मिलता हैं।
ज़्यादा मसालेदार खाना खाने से या अक्सर बाहर का खाना खाने से या फ़िर किसी संक्रमण की वज़ह से अचानक से दस्त में ब्लड आने लगता हैं जिसमें छुईमुई के पौधे की 10 ग्राम जड़ को एक गिलास पानी में उबालें इस पानी का एक चौथाई भाग रह जाने पर सुबह शाम पीने से आराम मिलेगा।
हमारे खान पान में गड़बड़ी हो जाने के कारण ही अपच या पेट फूलने जैसी समस्या उत्तपन्न हो जाती हैं। 10 से 15 मिली छुईमुई के पत्ते का रस पीने से अपच की वज़ह से होने वाली समस्या जैसे बुख़ार, पीलिया, व पित्त से संबंधित सभी प्रकार की समस्यओं में लाभ मिलता हैं।
जिन लोगों को ज़्यादा मसालेदार खाना खाने की आदत होती हैं ऐसे लोगों को अक्सर बबासीर की समस्या हो जाती हैं। आयुर्वेद के अनुसार छुईमुई में कयास रस होता हैं जो खूनी बबासीर को नियंत्रित करने में मदद करता हैं। इसके लिए छुईमुई के पत्ते औऱ जड़ के चूर्ण को एक गिलास दूध के साथ सुबह शाम लेने से बबासीर औऱ भगंदर में आराम मिलता हैं।
खेल कूद के दौरान अक्सर बच्चों को छोटे मोटे घाव लगते रहते हैं इनको ठीक करनें के लिए छुईमुई शरपुंखा औऱ भारंगी की जड़ों को समान मात्रा में ले कर पेस्ट बनाएं। इस पेस्ट को घाव पर लगाने से जल्दी ही राहत मिलेगी।
मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए छुईमुई का इस्तेमाल बहुत ही फायदेमंद साबित होता हैं। छुईमुई में एंटी डायबिटिक गुण मौज़ूद होता हैं जो कि ब्लड में शुगर की मात्रा को कंट्रोल करनें में मदद करता हैं।
छुईमुई का इस्तेमाल गठिया की आयुर्वेदिक औषधि के रूप में किया जा सकता हैं। छुईमुई में एंटी इंफेलेमेट्री औऱ दर्द निवारक गुण पाए जातें हैं, इसके इस्तेमाल से गठिया व गठिया में होने वाली सूज़न में औऱ दर्द से आराम मिलता हैं
कफ या अस्थमा संबन्धी समस्या के निवारण में छुईमुई का इस्तेमाल करना काफ़ी लाभदायक हैं। आयुर्वेद के अनुसार छुईमुई में कफ कम करने का गुण पाया जाता हैं। छुईमुई से जुड़ी हुई जानकारी को बिस्तार में जानने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करें।
आज कल खराब खान पान की वज़ह से लोगों में लिवर से संबंधित समस्या बढ़ती ही जा रही हैं ऐसे में आयुर्वेद चिकित्सकों का मानना हैं कि लिवर से संबंधित परेशानियों में छुईमुई का उपयोग करना फायदेमंद होगा। छुईमुई में हेप्टो प्रोटेक्टिव की क्रियाशीलता पायी जाती हैं जो हिप्टो टॉक्सिन से लिवर की सुरक्षा करती हैं।
अगर आपको कही पर भी कटने या चोट लगने पर ब्लड निकल रहा हो तो आप छुईमुई की जड़ को पीस कर ब्लड निकलने की ज़गह पर लगाये इससे ब्लड का बहाव रूक जाता हैं।
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