Brain stroke | ब्रेन हैमरेज
ब्रेन हैमरेज सभी ने सुना होगा इसे आम भाषा में दिमाग़ की नस फटना , दिमाग़ का दौरा ,और ब्रेन स्ट्रोक बोलते है। इसे आसान भाषा में समझे जब दिल की रक्त वाहनियों में थक्का बन जाता है जिससे रक्त का संचार रुक जाता है जिसे हम दिल का दौरा या हार्ट अटैक बोलते है, वैसे ही ब्रेन में भी होता है जब ब्रेन की रक्त वाहिनियों में कोई अवरोधक ( ब्लड क्लॉट ) आ जाता है उसे हम ब्रेन हैमरेज बोलते है ,आपको बता दे इंडिया में हर वर्ष एक लाख लोगो में से 130 लोग ब्रेन हैमरेज का शिकार हो रहे है। सर्दियो को इसके मामले कुछ ज़्यादा बढ़ जाते है अगर पहले से ही कुछ सावधानियां बरते तो ब्रेन हैमरेज से बचा जा सकता है और इसकी संख्या को कम किया जा सकता है। ब्रेन स्ट्रोक तीन तरह के होते है।
रक्त स्त्रावी हैमरेज ( स्ट्रोक )
इस स्ट्रोक में दिमाग की रक्त वाहिनी विशेष रूप से फूलने ,सूजने या ज़्यादा दबाब के कारण फट जाती है जिससे खून पूरे दिमाग में फैलने लगता है. इस स्थिति में रक्त संचार बाधित होता है और मृत्यु हो जाती है।
टेम्परेरी स्ट्रोक
टेम्परेरी स्ट्रोक में बचने की संभावना काफी हद तक बनी रहती है। इस स्थिति में रक्त का थक्का अस्थायी रूप से रक्त संचार को बाधित करता है इसमें मनुष्य का बेहोश होना शरीर के अंगो का काम न करना आदि लक्षण होते है सही वक़्त पर इलाज मिल जाए तो जान बचाई जा सकती है।
इस्केमिक स्ट्रोक
ये हैमरेज ज़्यादा ही देखा जाता है। शरीर में रक्त के थक्के जगह जगह हो जाते है और रक्त के ज़रिये दिमाग तक पहुंच जाते है दिमाग में भी यही थक्के जगह जगह हो जाते है और रक्त संचार को पूरी तरह से बाधित कर देते है।
ब्रेन हैमरेज ( स्ट्रोक ) के लक्षण
- बोलने और समझने में कठिनाई
- सिर् घूमना चक्कर आना
- शरीर के अंगो का अचानक काम करना रुक जाना
- उल्टी और चक्कर की शिकायत होना
- मुँह का टेढ़ा हो जाना
- साँस लेने में कठिनाई होना
- बेचैनी और पसीना आना
ब्रेन हैमरेज के कारण
गलत जीवन शैली ब्रेन हैमरेज का सबसे मुख्य कारण है और भी कारण है जैसे , शराब ,तम्बाखू ,गुटका ,पान अन्य नशीले पदार्थ , शरीर का मोटा होना, शारीरिक परिश्रम कम करना , अपने आप को ज़रूरत से ज़्यादा तनाव में रखना ,हाई ब्लड प्रेशर , ज़्यादा वसा युक्त भोजन करना , रक्त वाहिनियों में कोलोस्ट्रोल की मात्रा अधिक होना और हार्ट अटैक होने पर ब्रेन हैमरेज की खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है।
क्या होता है ख़ून का थक्का और सर्दियों में क्यों बढ़ते है ब्रेन हैमरेज के मामले ?
सर्दियों में रक्त में मौजूद प्लेटलेट्स आपस में चिपकने लगते है। यही प्लेटलेट्स आपस में चिपक कर एक थक्के ( क्लॉट ) का निर्माण करते है ,रक्त की वह प्रक्रिया होती है जिसके द्वारा वह द्रव की अवस्था से अर्ध-ठोस (जेल) की अवस्था में चला जाता है और एक जमावड़ा या थक्का बना लेता है और रक्त संचार को बाधित करता है जिससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक की समस्या उत्पन्न होती है।
कैसे करे बचाव
जैसे ही आपको शुरूआती लक्षण पता चले आपको तुंरत डॉक्टर की सलहा और संपर्क करे ,हैमरेज हो जाने पर 4 घंटे के अंदर व्यक्ति को इलाज मिल जाना चाहिए , ब्लड क्लॉट को खत्म और रक्त संचार ठीक करने वाली दवाएं इन्ही चार घंटो में प्रभावी रूप से काम करती है, इसके बाद बचने की संभावना काफी कम हो जाती है,
ब्रेन हैमरेज और हार्ट अटैक से बचने के लिए नियमित व्यायाम , हरी सब्ज़ियाँ , ओमेगा 3 का सेवन करना चाहिए।
ओमेगा 3 आपको फ्लेक्स सीड ( अलसी ) ,नट्स , मछली में आपको भरपूर मात्रा में मिलता है अगर आप इनको जीवनशैली में शामिल कर लेते है तो आपको ब्रेन हैमरेज और हार्ट अटैक की जैसी गंभीर समस्या से कोसो दूर रहते है। विस्तार से पढ़े click करे 👉 Omega 3 | ओमेगा 3 क्यों जरूरी है आपके लिए ।
चेतावनी - चिकित्सक से परामर्श ज़रूर ले।
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achi jankri
ReplyDeleteGreat knowledge about stroke 👍
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